बुलबुले में

बुलबुले में कैद कर रखा है खुद को तुमने कभी बाहर भी निकलो उस बुलबुले की ज़ंजीर से
कि रू-ब-रू हो हम भी तेरी तश्वीर से उस हसीन लम्हें का इंतज़ार है हमें भी,जब तुम रहो सामने मेरे और करूँ तेरा दीदार भी ..

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